अलीगढ नगर निगम चुनाव प्रक्रिया
सदस्यों का चुनाव मतदाता सूची अर्हता
अनर्हता मताधिकार अधिसूचना, मतदान एवं परिणाम
चुनाव प्रकिया पालिका के लिए चुनाव का संचालन राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किया जाता है। पालिका के लिए चुनाव प्रक्रिया के मुख्य बिन्दु निम्नलिखित हैं
सदस्यों का चुनावपालिका के सदस्यों का चुनाव नगर में निर्वाचकों द्वारा वयस्क मताधिकार के आधार पर होगा।
प्रत्येक कक्ष के लिये निर्वाचक नामावली प्रत्येक कक्ष के लिये एक निर्वाचक नामावली होगी, जो नगर पालिका अधिनियम के उपबन्धों के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के अधीन तैयार की जायेगी।
उत्तर प्रदेश में राज्य निर्वाचन आयोग ने भारतीय चुनाव आयोग के निर्देशन में मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा तैयार मतदाता सूची में कक्ष की जानकारी जोड़कर प्रयोग किया है।
सदस्य के निर्वाचन के लिये आर्हतायें कोई व्यक्ति सदस्य के रूप में चुने जाने के लिये और सदस्य होने के लिये तब तक अर्ह नहीे होगा जब तक की वह -
(क) नगर का निर्वाचक न हो
(ख) 21 वर्ष की आयु प्राप्त न कर चुका हो
(ग) स्थान के अनुसूचित जातियों,अनुसूचित जनजातियों,पिछणे वगरें या स्त्रियों के लिये आरक्षित होने की दशा में,जैसी भी स्थिति हो, सम्बन्धित श्रेणी का नहीं है।
सदस्यों की अनर्हतायें
(1) कोई भी व्यक्ति इस बात के होते हुए भी कि वह अन्यथा अर्ह है, सदस्य चुने जाने तथा होने के लिए अनर्ह होगा यदि -
(क) उसे वर्तमान नगर पालिका अधिनियम के आरम्भ से पूर्व अथवा पश्चात भारत के किसी न्यायालय द्वारा किसी अपराध का दोषी पाया गया हो, तथा से दो वर्ष से न्यून अवधि के लिए कारावास का दंड दिया गया हो, जब तक की उसके छूटने के दिनांक से पाच वर्ष की अवधि इससे कम ईसी अवधि, जिसकी अनुमति राज्य सरकार किसी विशेष मामले में दे, व्यतीत ना हो गयी हो।
(ख) वह अनुमुक्त दिवालिया हो
(ग) वह पालिका में लाभ के किसी पद पर हो
(घ) वह चाहे स्वयं, चाहे उसके लिये के रूप में अथवा उसके लाभ के लिये या उसके लेखे में किसी व्यक्ति द्वारा, पालिका को माल सम्भरित करने के लिये या किसी निर्माण कार्य के निष्पादन के लिए किन्हीं सेवाओं को, जिनका भार निगम ने अपने ऊपर लिया हो, सम्पन्न करने के लिये किये गये किसी संविदे में कोई हिस्सा या हित रखता हो
(ड.) वह पालिका को देय ईसे कर के जिन पर धारा 504 लागू होती है अथवा ईसे मूल्य के, जो पालिका द्वारा दिये गये पानी के लिये देय हो एक वर्ष से अधिक अवधि के बकाये का देनदार हो
(च) यदि वह भारत सरकार अथवा किसी राज्य सरकार के अधीन कोई पद ग्रहण करके भ्रष्टाचार अथवा राजद्रोह के पदच्युत हो चुका हो, जब तक कि उसके पदच्युत होने के दिनांक से छ वर्ष की अवधि न व्यतीत हो गयी हो।
(छ) वह किसी सक्षम प्राधिकारी आज्ञा से वकालत करने के लिये वर्जित कर दिया गया हो
(ज) वह नगर पालिका अधिनियम की धारा 80 तथा 83 के अधीन पालिका का सदस्य होने के लिये अनर्ह है
(झ) वह किसी ईसे संसर्गजन्य रोगों में से किसी से ग्रस्त है, और राज्य सरकार की आज्ञा द्वारा निर्दिष्ट किये जायेंगे और मुख्य अधिकारी से अन्यून पद के किसी चिकित्साधिकारी ने उस रोग को असाध्य घोषित कर दिया है
परन्तु प्रतिबन्ध यह है कि खण्ड (च) की दशा में बकाया अदा कर देने पर तुरन्त अनर्हता साप्त हो जायेगी ढइतझ और प्रतिबन्ध यह भी है कि किसी कर अथवा पानी के मूल्य का बकाया जो उस क्षेत्र, जिसको अब नगर अधिसूचित कर दिया गया है, में क्षेत्राधिकार रखने वाली निगम, परिषद अथवा अन्य स्थानिय प्राधिकारी को देय हो, उसको पालिका का बकाया सम-हजया जायेगा।
(न) राज्य विधान मण्डल के निर्वाचनों के प्रयोजनों के लिये तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा या के अधीन अनर्ह हो किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि कोई व्यक्ति इस आधार पर अनर्ह नहीं होगा कि वह पच्चीस वर्ष से कम आयु का है, यदि उसने इक्कीस वर्ष की आयु प्राप्त कर ली हो।
(2) कोई व्यक्ति सदस्य चुन लिये जाने पर सदस्य बने रहने के लिये अनर्ह होगा यदि वह-
(1) स्वं अथवा किसी ईसे फार्म के नाम से, जिसमें वह सा-हजयीदार है, अथवा जिसके साथ वह वृत्तिक हैसियत से लगा हुआ है, किसी ईसे वाद या सिलसिले में जिसमें नगर आयुक्त का कोई हित या संबंध है वह वृत्तिक हैसियत से रोक रखा जाता है अथवा नियोजित किया जाता है, अथवा
(2) स्वयं बीमारी अथवा पालिका द्वारा स्वीकृत अन्य किसी कारण से अनुपस्थित रहता है।
(3) पालिकानगम की किसी बैठक में इस प्रकार से बाधा उत्पन्न की है कि निगम के लिये उस बैठक का कार्य संचालन असम्भव हो जाये अथवा ईसा करने के लिये किसी को उकसाया है ; या
(4) पालिका के किसी अधिकारी या कर्मचारी के साथ दुव्र्यवहार किया है; या
(5) प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, निगम की किसी सम्पत्ति को कोई हानि या क्षति पहुचाई है या किसी अन्य व्यक्ति को ईसी हानि या क्षति के लिये दुष्प्रेरित करता है; या
(6) किसी अपराध के लिये, जिसमें राज्य सरकार की राय में, नैतिक अधमता अन्तर्ग्रस्त है, सिऱ्धदोष ठहराया जाये।
(3) उपधारा (1) क खन्ड (ग) के अधीन काकेई व्यक्ति केवल इसलिये अनर्ह हुआ न समझा जायेगा कि वह
(1) कोई पेंशन पाता है,
(2) अध्यक्ष या उपाध्यक्ष या सदस्य के रूप में काम करते हुए कोई भत्ता या सुविधा पाता है।
(4)उपधरा (6) के खन्ड () के अधीन कोई व्यक्ति केवल इस लिये अनर्ह हुआ न समझा जायेगा कि उसका निम्नलिखित में कोई हिस्सा या हित है-
(1) कोई संयुक्त संभार समवाया अथवा उ0प्र0 सहकारी समिति अधिनियम 1965 के अधीन पंजीकृत अथवा पंजीकृत समझी गयी कोई समिति, जिससे पालिका की ओर से नगर आयुक्त संविदा करेगा अथवा जिसे वह नियोजित करेगा
(2) पालिका के लिये नगर आयुक्त को बेची जाने वाली किसी ईसी वस्तु के प्रायिक विक्रय में जिसमें वह किसी कैलेंडर वर्ष में कुल मिलाकर 2,000 रू0 से अनधिक मूल्य का नियमित रूप से व्यापार करता है।
(5) कोई व्यक्ति जो सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के पश्चात इस धरा के अधीन अनर्ह हो जाये,
मताधिकार
(1) कोई भी व्यक्ति, जिसका नाम तत्समय किसी कक्षकी निर्वाचक नामावली में दर्ज नहीं है, उस कक्ष में मत देने का अधिकार नहीं होगा तथा नगर पालिका अधिनियम द्वारा स्पष्ट रूप से उपबन्धित दशा को छोड़कर प्रत्येक ईसा व्यक्ति, जिसका नाम तत्समय किसी कक्ष की निर्वाचक नामावली में दर्ज है उस कक्ष में मत देने का अधिकारी होगा।
(2) कोई भी व्यक्ति किसी कक्ष के किसी निर्वाचन में मत नहीं दे सकेगा यदि वह धारा 37 में उल्लिखित अनर्हताओं में से किसी के अधीन है।
(3) कोई भी व्यक्ति किसी सामान्य निर्वाचन में पालिका के एक से अधिक कक्षों में मतदान नहीं करेगा, और यदि वह उक्त किसी एक से अधिक कक्षों में मतदान करता है, तो सभी कक्षों में उसका मत सून्य हो जायेगा।
(4) इस बात के होते हुए भी कि किसी निर्वाचक का नाम किसी कक्ष की निर्वाचक नामावली में एक से अधिक बार दर्ज हो गया है, वह व्यक्ति किसी निर्वाचन में एक से अधिक बार मतदान नहीं करेगा और यदि वह मतदान करता है, तो उ कक्ष में उसके सभी मत शून्य हो जायेंगे।
(5)यदि कोई व्यक्ति कारावास की, निर्वासन की अथवा अन्य किसी प्रकार की दंडाज्ञा के अधीन किसी कारावास में बंद है, अथवा पुलिस की वैद्या अभिरक्षा में है, तो वह मतदान नहीं करेगा; किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि उपधारा में कोई बात उस व्यक्ति पर लागू नहीं होगी, जो तत्समय प्रचलित किसी विध के अन्र्तगत निवारक निरोध के अधीन हो।
चुनाव अध्यादेश, मतदान एवं परिणाम राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव अथवा मध्यावधि चुनाव की तिथियों की घोषणा करता है। राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव पर्यवेक्षकों की भी नियुक्ति करता है जो नामांकन एवं परिणाम की घोषणा करता है। राज्य निर्वाचन आयोग आचार चुनाव संहिता के अनुपालन को भी सुनिश्चित करता है।